नील विद्रोह | BPSC Solution
नील विद्रोह पे एक नजर
इस समय रासायनिक रंगो के अविष्कार से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय निल की मांग कम हो गयी तथा भारतीय निल विश्व बाजार में प्रतिस्पर्धी न रही जिस कारण किसानो की हालत और दयनीय हो गयी। इसी क्रम में बागान मालिकों ने धीरे -धीरे किसानों को निल की खेती से मुक्त करना आरम्भ कर दिया
Important current affairsपर इसके बदले में लगान की दरों में काफी वृद्धि कर दिया। जिन क्षेत्रों में निल की खेती नहीं होती थी वहाँ भी लगान की दर में बढ़ोतरी हुई इस प्रकार से इस क्षेत्र में किसानो की स्थिति बहत ही दयनीय हो गयी।
इन्ही परिस्थितियों में चम्पारण के किसान राजकुमार शुक्ल किसानो के नेता बनकर 1916 ई० में लखनऊ अधिवेशन में किसानो की दशा सुधारणे के लिए गांधीजी को चम्पारण आने का निमंत्रण भेजा।
गांधीजी जब बिहार पहुँचे थे तब मुजफरपुर के कमिश्नर ने उन्हें वापस लौटने का आदेश दिया। किन्तु गांधीजी इसे नहीं माने और चम्पारन पहुंच गए गांधीजी के पहुंचने से किसानो के चेहरे दपर रौनक आ गयी वही सर्कार की चिंता बढ़ने लगी और तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट हेकोक ने उन पर धारा 144 के तहत मुकदमा दायर कर अंग्रेजी कानून तोरने का आरोप लगाया।
तब गांधीजी ने आरोपों को स्वीकार कर सविनय अवज्ञा का प्रयोग किया। गांधीजी की लोकप्रियता तथा विशाल जन समर्थन के कारण सरकार को न केवल मुकदमा वापस लेना परा और साथ ही साथ उन्हें स्वतंत्र जाँच के अधिकार भी देने परे।
गांधीजी गांव गांव जाकर किसानो की हालत देखा करते थे इसी बिच सरकार ने चम्पारण अग्रेरियन कमिटी का गठन किया जिसमे गांधीजी को भी सदस्य बनाया गया।
इसमें तिनकथिया प्रणाली को भी समाप्त किया गया। किसानो को निल की खेती से मुक्त कराया गया किसानो से की गयी अवैध वसूली का 25 प्रतिशत लौटाया गया।
बढ़े हुए लगन का 1 /4 हिस्सा छोर दिया गया। चम्पारण आंदोलन में पहली बार किसान की समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया गया।
गाँधी जी को महात्मा की उपाधि
राजेंद्र प्रसाद जी ने कहा की इस आंदोलन द्वारा राष्ट्र ने अपना पहला पाठ सीखा। और सत्याग्रह का पहला आधुनिक उदाहरण प्रस्तुत किया।
पहली बार किसान समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया गया। अन्यायपूर्ण व्यवस्था के प्रतिरोध का अकाट्य शस्त्र सत्याग्रह एवं अहिंसा का सूत्रपात हुआ।
किसान समस्या के समाधान हेतु राष्ट्रीय नेत्ताओं का सहयोग प्राप्त हुआ। इसी आंदोलन से प्रेरित होकर कालांतर में बहुत सारे आंदोलन हुए।
Important History
इसी के बाद से किसान की समस्या समाधान हेतु कांग्रेस कार्यरत हुई। इसी आंदोलन के बाद रविंद्र नाथ टौगोर ने गांधीजी को महात्मा की उपाधि दी थी।
इससे आमजनो में गांधीजी के प्रति विश्वास बढ़ा था चंपारण में सबसे पहले सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा सत्याग्रह का सफल प्रयोग हुआ।
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पहली बार किसान समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया गया। अन्यायपूर्ण व्यवस्था के प्रतिरोध का अकाट्य शस्त्र सत्याग्रह एवं अहिंसा का सूत्रपात हुआ।
किसान समस्या के समाधान हेतु राष्ट्रीय नेत्ताओं का सहयोग प्राप्त हुआ। इसी आंदोलन से प्रेरित होकर कालांतर में बहुत सारे आंदोलन हुए।
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इसी के बाद से किसान की समस्या समाधान हेतु कांग्रेस कार्यरत हुई। इसी आंदोलन के बाद रविंद्र नाथ टौगोर ने गांधीजी को महात्मा की उपाधि दी थी।
इससे आमजनो में गांधीजी के प्रति विश्वास बढ़ा था चंपारण में सबसे पहले सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा सत्याग्रह का सफल प्रयोग हुआ।
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आगे next पोस्ट में।...

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